कंप्यूटर का उपयोग करने वाला शायद ही कोई व्यक्ति हो जो कांपेक्ट डिस्क सीडी के नाम से परिचित न हो। छोटी सी सीडी ने तकनीक की दुनिया में धूम मचा दी है। वहीं बाजारों में सीडी की आमद ने टेप रिकार्डर में उपयोग में लाई जाने वाली परंपरागत टेप कार्टिज सामान्य भाषा में कैसेट का सफाया कर दिया है।
राजधानी के एक डीवीडी स्टोर के मालिक अनुज तनेजा ने बताया कि फिल्म प्रदर्शित होने के पहले से ही लोग सीडी का इंतजार करने लगते हैं। संगीत प्रेमियों के बीच भी अब आडियो कैसेट लोकप्रिय नहीं रह गई हैं बल्कि सभी सीडी लेना ही पसंद करते हैं।
कमोबेश यही हाल फिल्म के वीडियो का भी है। वीडियो सीडी के व्यापारी सुनील मंगतानी बताते हैं कि लगभग एक दशक पहले तक लोग नई प्रदर्शित होने वाली फिल्म की वीडियो कैसेट के पीछे दीवाने रहते थे लेकिन अब कैसेट को कोई नहीं पूछता और वीडियो सीडी और डीवीडी हाथों हाथ बिकती हैं।
विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों के लिए भी सीडी जीवन की जरूरत बन चुकी है। सीडी के दाम कम होने और उसकी क्षमता ज्यादा होने से भी इसका दैनिक जीवन में खासा महत्व है। इंजीनियरिंग के विद्यार्थी पीयूष तलवार का कहना है कि परीक्षाओं के दौरान दोस्तों से नोट्स लेने में सीडी का ही उपयोग करते हैं इसके अलावा फिल्मों और संगीत का शौक भी सीडी ही पूरा करती हैं।
मोल्डेड पालीमर से बनने वाली सीडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें डाटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है जिसके चलते इसकी डाटा सुरक्षित रखने की क्षमता कैसेट और फ्लापी जैसे परंपरागत उपकरणों से कहीं ज्यादा होती है साथ ही यह इसी तरह के अन्य उपकरणों से ज्यादा भरोसेमंद होती है।
सीडी के बाद आए इसके आधुनिक रूप डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क डीवीडी की क्षमता और भी ज्यादा होती है जो फिल्म सुरक्षित रखने के काम आती है।
तकनीक की शुरूआत में सीडी रीड आनली सीडी पर सुरक्षित डाटा को सिर्फ पढ़े जा सकने वालीआती थीं लेकिन नई तकनीक के आने के बाद से सीडी पर लिखा भी जाने लगा।
अगले कुछ दिनों में वैज्ञानिक ऐसी भी डीवीडी बाजार में लाने वाले हैं जिनका आकार तो वर्तमान सीडी जैसा ही होगा लेकिन डाटा सुरक्षित रखने की उनकी क्षमता 2 000 गुना ज्यादा होगी। वैज्ञानिक सीडी की क्षमता को नैनोस्कोपिक कणों के उपयोग से बढ़ाए जाने की ओर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।
विश्व को सीडी की सौगात सबसे पहले सोनी कंपनी ने 1976 में दी। सोनी ने सबसे पहले एक आप्टिकल डिजिटल आडियो डिस्क दुनिया के सामने पेश की। इसके बाद सोनी ने ही 1978 में 150 मिनट चलने वाली सीडी बनाई। बाजार में सीडी पहली बार 1982 में आई।
Via- WEB DUNIA
आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
ReplyDeleteलिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
गार्गी
hari om
ReplyDeleteacchi jankari
pahale jo record black rang ke aate the unko log tave vala baja kahate the, usi ka naya rup hai ye. narayan narayan
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