स्विस फडरल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और गूगल स्विटजरलैंड ने खुलासा किया है कि ब्राउजर को अपडेट रखने वाली इन-बिल्ट मैकेनिज्म जो स्वचालित तरीके से अपडेट्स को डाउनलोड और स्थापित करती है ज्यादा सुर्क्षित ब्राउजिंग उपलब्ध कराती है बजाए ऐसे ब्राउजर के जिसमें यूजर को अपडेट के लिए संकेत दिया जाता है और यूजर को उसे मैन्युअली डाउनलोड करना पड़ता है।
अध्ययन में बताया गया है कि गूगल के सर्वर्स देखते समय केवल 45 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स ही सबसे सुरक्षित ब्राउजर संस्करण का उपयोग करते हैं। यह भी पाया गया कि फायरफॉक्स यूजर्स में से 83 प्रतिशत ब्राउजर के नवीनतम संस्करण का उपयोग कर रहे थे। इसी प्रकार गूगल क्रोम सिर्फ 21 दिनों में ब्राउजर को अपडेट करता है और 97 प्रतिशत यूजर्स इसके नवीनतम संस्करण का उपयोग कर रहे थे।
इसके विपरीत सफारी के केवल 53 प्रतिशत यूजर्स ने ही सफारी के ब्राउजर को नए संस्करण से अपडेट किया था जो 3 हफ्ते पहले जारी किया गया था। नवीनतम संस्करण उपयोग करने वाले ऑपेरा यूजर्स का प्रतिशत और भी कम 24 प्रतिशत है। इसका सीधा मतलब है कि 76 प्रतिशत ऑपेरा यूजर्स उन ऑनलाइन खतरों के प्रति संवेदनशील हैं जो नए अपडेट्स से नियंत्रित हो जाते हैं।
Via- WEB DUINA
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