Friday, June 19, 2009

गूगल का माइक्रोब्‍लॉगिंग सर्च इंजि‍न

माइक्रोब्‍लॉगिंग सेवाओं को मि‍ली खासी लोकप्रि‍यता के बाद गूगल इन सेवाओं में आ रही असमानताओं की खाई पाटने के लि‍ए सटीक उपाय करने की तैयारी कर रहा है। गूगल ब्लॉग पर दी गई एक जानकारी के अनुसार गूगल एक ऐसी सेवा लॉन्‍च करने जा रहा है जो ट्वि‍टर जैसी माइक्रोब्‍लॉगिंग सेवाओं की सामग्री को सूचीबद्ध करेगी और उसे रेंक देगी।

ट्वि‍टर के मामले में माइक्रोब्‍लॉगिंग सेवाओं में एक खामी यह है कि‍ माइक्रोब्‍लॉगिंग ट्वि‍टर तक ही सीमि‍त है और दूसरी यह कि‍ वो परि‍णाम दि‍नांक के अनुसार सूचीबद्ध करती है।

हालाँकि‍, कुछ ऐसे भी सर्च इंजि‍न है जैसे ट्वीफाइंड और ट्विंग्‍ली, जो वि‍भि‍न्‍न स्‍तरों पर इंडेक्‍सिंग को ठीक करने और ट्वि‍टर पोस्‍ट को प्रासंगि‍कता के आधार पर सॉर्ट करने की कोशि‍श कर रहे हैं। लेकि‍न वो ज्‍यादा अच्‍छे नहीं हैं।

ब्‍लॉग में कहा गया है कि‍ माइक्रोब्‍लॉगिंग खोज सेवा भी गूगल ब्‍लॉग सर्च प्रोडक्‍ट की तरह ही कार्य करेगी। इसमें परि‍णाम प्रासंगि‍कता के आधार पर दि‍खाए जाएँगे और यह सेवा गूगल वेब सर्च इंजि‍न से जुड़ी हुई होगी। ब्‍लॉग पर ताजा पोस्‍ट में उपयोग कि‍ए गए कीवर्ड्स माइक्रोब्‍लॉगिंग यूनि‍वर्सल सर्च ग्रुप में ट्रि‍गर होंगे।

Thursday, June 18, 2009

सफारी 4 को जबरदस्‍त प्रति‍साद

नए इंटरनेट ब्राउजर सफारी 4 को लॉन्‍च होते ही जबरदस्‍त प्रति‍साद मि‍ला है। जारी होने के पहले तीन दि‍नो में ही इसकी 1 करोड़ 10 लाख प्रति‍यों को इंटरनेट से डाउनलोड कि‍या गया है। इसमें विंडोज के लि‍ए 60 लाख डाउनलोड्स भी शामि‍ल हैं।

एप्‍पल का सफारी 4 वि‍श्‍व का सबसे तेज, सबसे नया ब्राउजर है जो दुनि‍या की सबसे लेटेस्‍ट और एड्वान्स तकनीकी से बनाया गया है। इस तकनीक में नया नीट्रो जावास्‍क्रि‍प्‍ट इंजि‍न शामि‍ल है जो जावास्‍क्रि‍प्‍ट को इंटरनेट एक्‍सप्‍लोरर 8 से लगभग आठ गुना तेजी से और फायरफॉक्‍स 3 से चार गुना से अधि‍क तेजी से एग्जीक्‍यूट करता है। सफारी एचटीएमएल वेब पेजों को इंटरनेट एक्‍सप्‍लोरर 8 से लगभग तीन गुना से अधि‍क तेजी से और फायरफॉक्‍स 3 से तीन गुना अधि‍क तेजी से लोड करता है।

सफारी 4 में टॉप साइट्स, फुल हि‍स्‍ट्री सर्च और कवर फ्लो जैसे नए फीचर्स जोड़े गए हैं। साथ ही इसमें ऑफलाइन तकनीकि‍यों के लि‍ए एचटीएमएल 5 सपोर्ट और उन्‍नत सीएसएस प्रभावों का भी सपोर्ट है। जि‍ससे नए वेब एप्‍लि‍केशंस सक्षम कि‍ए जा सकते हैं। इन नए वेब एप्‍लि‍केशंस में रि‍च मीडि‍या, ग्राफि‍क्‍स और फॉन्‍ट्स जैसी सुवि‍धाएँ हैं।

सफारी 4 पहला ऐसा ब्राउजर है जि‍सने वेब स्‍टेन्‍डर्ड प्रोजेक्ट के एसि‍ड3 टेस्‍ट को पास कि‍या है। इस टेस्‍ट में यह जाँच की जाती है कि‍ कोई ब्राउजर सीएसएस जावास्‍क्रि‍प्‍ट, एक्‍सएमएल और एसवीजी मानकों का कि‍तनी अच्‍छी तरह से पालन करता है जो वि‍शेष रूप से डायनामि‍क वेब एप्‍लि‍केशंस के लि‍ए बनाए गए हैं।

Friday, June 12, 2009

चीनी यूजर्स को एसटी-इरक्‍सन का तोहफा

एसटी-इरक्‍सन और उसकी चीनी सहायक कंपनी टी3जी ने सैमसंग के हाई एंड डि‍वाइस एम्‍राल्‍ड (जीसी - आई6320सी) के लि‍ए टीडी-एचएसडीपीए और एज प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराया है।

इसी के साथ सैमसंग मोबाइल के साथ एसटी-इरक्‍सन और उसकी चीनी सहायक कंपनी टी3जी ने अपनी भागीदारी को मजबूत कर ली है। सैमसंग के हाई एंड डि‍वाइस एम्‍राल्‍ड (जीसी - आई6320सी) हाल ही में लॉन्‍च कि‍या है। इससे चीनी यूजर्स अपने मल्‍टीमीडि‍या फोन्‍स पर हाई स्‍पीड मोबाइल इंटरनेट का मजा ले सकेंगे।

एसटी-इरक्‍सन के अध्‍यक्ष और सीईओ अलैन दुथील ने बताया कि‍ सैमसंग की यह लॉन्‍चिंग चीन में टीडी-एससीडीएमए आधारि‍त डेटा सर्वि‍स के वि‍कास के लि‍ए महत्‍वपूर्ण है। हमारी रणनीमि‍क साझेदारी चीनी उपभोक्‍ताओं को उनके मोबाइल पर ब्रॉडबैंड की अनोखी सुवि‍धा देगी।

एसटी-इरक्‍सन का मल्‍टीमीडि‍या प्‍लेटफॉर्म टी7210 सैमसंग के स्‍टायलि‍श एम्‍राल्‍ड फोन में जुड़ेगा। जि‍ससे यूजर्स को इंटरनेट से जुड़ी कई सुवि‍धाएँ मि‍लेंगी।

Thursday, June 11, 2009

बिना आईएमईआई वाले मोबाइल बंद होंगे

ई दिल्ली, भाषा। गृह मंत्रालय बिना आईएमईआई पहचान नंबर वाले चीनी मोबाइल फोनों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर सकता है। इस तरह के हैंडसेटों का एक बड़ा हिस्सा चीन से आता है।

जिन फोनों में अंतरराष्ट्रीय मोबाइल इक्विपमेंट पहचान आईएमईआई संख्या नहीं होती उन्हें सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। विशेषकर 26 नवंबर 2008 को मुम्बई में आंतकी हमले के बाद इनके इस्तेमाल को लेकर चिंता व्यक्त जा रही है।

शीर्ष सूत्रों ने आज कहा कि सुरक्षा खतरों के बावजूद किसी भी सरकारी एजेंसी ने वाणिज्य मंत्रालय से चीन से मोबाइल फोन के आयात पर प्रतिबंध की बात नहीं की है। सूत्रों ने कहा गृह मंत्रालय और न ही दूरसंचार कंपनियों ने ऐसे मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने के लिये वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखा है।

उल्लेखनीय है कि वाणिज्य मंत्रालय स्थायी तौर पर ऐसे मोबाइल फोन के आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है और आयातकों के लिये आईएमईआई जरूरत को अनिवार्य कर सकता है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस मामले पर वह जल्द वाणिज्य मंत्रालय को लिखेंगे।

देश में तकरीबन 250 लाख ग्राहक चीन में बने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे है। मोबाइल कंपनी एयरटेल और वोडाफोन पहले ही कह चुकी है कि वह बिना आईएमआईई संख्या वाले मोबाइल फोन से संपर्क का अस्वीकार करेंगी।

हैकिंग से बचने के लि‍ए नया सॉफ्टवेयर

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने प्रोग्राम्‍स में सुरक्षा की 31 कमि‍यों को दूर करने के लि‍ए नया सॉफ्टवेयर जारी कि‍या है। दूसरी तरफ एडोबे सि‍स्‍टम्‍स ने अपने उत्‍पादों में मालफंक्शन होने के कारण उन पर हैकर्स की पहुँच की आशंका व्‍यक्त की है।

माइक्रोसॉफ्ट ने मंगलवार को विंडोज, ऑफि‍स और इंटरनेट एक्‍स्‍प्‍लोरर और व्‍यावसायि‍क उपयोग में आने वाले सॉफ्टवेयर के मुख्‍य भागों की सुरक्षा संबंधी कमि‍यों को दूर करने के लि‍ए उपायों का खुलासा कि‍या। एडोबे ने रीडर और एक्रोबेट यूजर्स को नए संस्‍करणों से अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट करने का सुझाव दि‍या है। यदि‍ पहले से उपलब्‍ध संस्‍करण आपके पीसी के संगत नहीं है तो अति‍रि‍क्त सॉफ्टवेयर भी उपलब्‍ध होगा।

एडोबे का कहना है कि‍ विंडोज पीसी वाले सि‍सटम्‍स के साथ-साथ एप्‍पल के मेसिंटोश कंप्‍यूटर्स को भी है। हैकर्स को जब सुरक्षा की दरारें मालूम हो जाती हैं तो वे सुरक्षा को भेदने के लि‍ए तुरंत मालेशि‍यस सॉफ्टवेयर बना लेते हैं। ऐसे सॉफ्टवेयर्स का उपयोग सायबर क्राइम में किया जाता है जैसे पहचान चोरी, स्‍पैम भेजना और कंप्‍यूटर्स का नि‍यंत्रण हथि‍याना।

सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का कहना है कि‍ अभी कुछ और ऐसे मालेशि‍यस सॉफ्टवेयर का पता लगाना बाकी है जि‍ससे कंप्‍यूटर की सुरक्षा को खतरा है।

अपने कंप्‍यूटर की सुरक्षा के लि‍ए यूजर इस सॉफ्टवेयर को इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं। लेकि‍न यूजर को इन्‍हें अपने कंप्‍यूटर पर इंस्‍टॉल करने से पहले इनका परीक्षण करना होगा।

वेब 2.0 शब्द ने पाया 10 लाखवाँ स्थान

ह्यूस्टन। अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े नए शब्द "वेब 2.0" ने अँगरेजी भाषा के शब्दों में 10 लाखवाँ स्थान प्राप्त किया है। 10 लाखवाँ शब्द बनने की दौड़ में कई शब्द शामिल थे जिनमें दूसरे नंबर पर "जय हो" और चौथे नंबर पर "स्लमडॉग" रहा। अमेरिका के ग्लोबल लैंग्वेज मॉनिटरिंग ग्रुप ने स्थानीय समयानुसार बुधवार सुबह 10.22 मिनट पर वेब 2.0 शब्द को 10 लाखवाँ शब्द बनाने की घोषणा की।

इस शब्द को दुनियाभर में 25 हजार बार इंटरनेट पर सर्च किया गया। इस क्रम पर आने की दौड़ में दूसरे नंबर पर जय हो, तीसरे पर नूब और चौथे पर स्लमडॉग शब्द रहे। वेब 2.0 सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ा शब्द है और यह आने वाले युग में वर्ल्ड वाइड वेब से जुड़ी सामग्रियों और सेवाओं में शामिल हो जाएगा।

लाखवाँ शब्‍द बनने की कतार के अंग्रेजी के सेक्‍सि‍टिंग, जॉम्‍बी बैंक्‍स, डीफ्रेंड जैसे शब्‍द भी शामि‍ल थे जो ग्लोबल लैंग्वेज मॉनिटर द्वारा नि‍र्धारि‍त वैश्‍वि‍क वि‍तरण के वि‍स्‍तार की आवश्‍यकता वाले न्‍यूनतम 25000 उद्धहरणों और उद्धहरणों की गहराई के मापदंडो को पूरा करते थे।

पिछले छः माह में इस शब्द का दुनियाभर में काफी प्रचार-प्रसार हुआ। जय हो एक फिल्मी गीत है, जिसे भारत के श्रेष्ठ संगीतकार एआर रहमान ने तैयार किया है और स्लमडॉग एक फिल्म का पहला नाम है, जिसकी मूल भाषा अँगरेजी थी और पृष्ठभूमि भारतीय। इस फिल्म ने आठ ऑस्कर के साथ-साथ कई अकादमी पुरस्कार भी हासिल किए।

गणित का फॉर्मूला

ग्लोबल लैंग्वेज मॉनिटरिंग ग्रुप ने इन शब्दों का क्रम तय करने के लिए गणित का एक फॉर्मूला तय किया। उसके अनुसार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इन शब्दों के प्रसार और इंटरनेट खोज पर ध्यान केंद्रित किया गया।

साथ ही 'फायनेंशि‍यल सुनामी' को वेब 2.0 के ठीक बाद वाला क्रम दि‍या गया है। यह शब्‍द वि‍श्व की वि‍त्तीय संरचना से संबंधि‍त है।

Wednesday, June 10, 2009

गूगल का नया सॉफ्टवेयर

गूगल ने अपनी सबसे बड़ी प्रति‍द्वंदी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के बि‍जनेस यूजर्स को हथि‍याने की पूरी तैयारी कर ली है।

गूगल ने यूजर्स के लि‍ए एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है जि‍ससे माइक्रोसॉफ्ट के मेलिंग सॉफ्टवेयर आउटलुक का उपयोग करने वाले यूजर्स आसानी से गूगल के वेब आधारि‍त कम्‍युनि‍केशन और कोलेबरेशन उत्‍पादों पर स्‍वि‍च कर सकेंगे। हालाँकि‍ कंपनी ने स्‍पष्‍ट कि‍या है कि‍ उसका उद्देश्‍य यूजर्स को गूगल के वेब आधारि‍त ईमेल का उपयोग करने के लि‍ए बाध्‍य करना नहीं हैं बल्‍कि‍ यूजर्स को नए वि‍कल्‍प उपलब्‍ध कराना है।

गूगल ने कल बताया कि‍ उन्‍होंने एक ऐसा सॉफ्टवेयर वि‍कसि‍त कि‍या है जि‍सके उपयोग से माइक्रोसॉफ्ट एक्‍सचेंज सर्वर से डेटा को गूगल की क्‍लाउड बेस्‍ड ऑनलाइन सेवा पर ट्रांसफर कि‍या जा सकता है। इससे यूजर आउटलुक का उपयोग ईमेल और अन्‍य कार्यों के लिए कर सकते हैं लेकि‍न बैक एंड फंक्‍श्‍नालि‍टी और डेटा संग्रह कंपनी के इंटरनल सर्वर (जि‍स पर माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर चलता है) पर रखने की बजाए गूगल के सर्वर पर चला जाएगा।

फि‍लहाल कंपनी के पास 10 लाख 75 हजार बि‍जनेस यूजर्स हैं जि‍नमें जेनेनटेक और एवोगो जैसी कंपनि‍याँ शामि‍ल हैं।

सोनी ने नया गेम डि‍वाइस लॉन्‍च कि‍या

सोनी कॉर्पोरेशन ने हाल ही में एक छोटा और हल्‍के प्‍लेस्‍टेशन वाला गेम डि‍वाइस पीएसपी गो लॉन्‍च कि‍या है।

इसे 1 अक्‍टूबर को उत्तरी अमेरि‍का और यूरोप के बाजारों में लाया जाएगा और जापान में यह 1 नवंबर को लॉन्‍च होगा। यह गेम डि‍वाइस सोनी के वर्तमान पीएसपी 3000 क आकार का लगभग आधा और वजन में 40 प्रति‍शत कम होगा। इसकी कीमत लगभग 249 डॉलर होगी।

3.8 इंच बड़ी स्‍क्रीन वाले इस स्‍लाडर डि‍वाइस में वाय फाय सुवि‍धा के साथ गाने, फोटो और गेम्‍स डाउनलोड करने के लि‍ए 16 गीगाबाइट का स्‍थान उपलब्‍ध है। साथ ही इसमें ब्‍लूटूथ की भी सुवि‍धा होगी।

माना जा रहा है सोनी ने अपना नया प्‍लेस्‍टेशन नाइनटेंडो के मोबाइल गेम के साथ प्रति‍योगि‍ता में लॉन्‍च कि‍या है।

Tuesday, June 9, 2009

फेल्ड एसएमएस से करोड़ों की कमाई

नई दिल्ली। मोबाइल कंपनियाँ ग्राहकों को चूना लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं। शायद आपको पता नहीं होगा कि आपके मोबाइल से भेजा गया एसएमएस अगर डिलीवर नहीं हो पाता तो फेल्ड हो जाता है। लेकिन कंपनियाँ इसके एवज में भी आपसे शुल्क वसूलती हैं।

कंपनियों की इस करतूत पर अब सख्त रवैया अपनाया गया है। दस मोबाइल ऑपरेटरों से बिना डिलीवरी वाले एसएमएस का ब्योरा माँगा गया है। ऐसा करने वाली कंपनियों पर अब नजर रखी जाएगी।

अगर आप भी मोबाइल कंपनियों के इस हथकंडे के भुक्तभोगी हैं तो इसकी शिकायत कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक एकाधिकार और प्रतिबंधित व्यापार आयोग (एमआरटीपीसी) ने मोबाइल ऑपरेटरों के खिलाफ यह जाँच एक ग्राहक की शिकायत पर शुरू की है। आयोग ने खास तौर से दिवाली और नए साल के मौके पर डिलीवर नहीं होने वाले एसएमएस का ब्योरा माँगा है।

पाम प्री स्‍मार्टफोन लॉन्‍च

छ: महीने की लंबी प्रतीक्षा के बाद पाम सेल पसंद करने वालो को आखि‍र उनका तोहफा मि‍ल ही गया। पाम कंपनी ने पाम प्री के रूप में नया स्‍मार्टफोन लॉन्च कि‍या है।

फोन का पहली बार प्रदर्शन जनवरी में कि‍या गया था लेकि‍न तब इसके लॉन्‍च की घोषणा नहीं हुई थी। हाल ही में इसे औपचारि‍क रूप से लॉन्‍च कि‍या गया। यह यू एस में पाम के औपचारि‍क नेटवर्क कैरि‍यर, स्‍प्रिंट द्वारा यूजर्स के लि‍ए उपलब्‍ध कराया जाएगा। इसे फि‍लहाल एप्‍पल के नए आईफोन का प्रति‍द्वंदी माना जा सकता है। हालाँकि‍ लॉन्‍च के पहले दि‍न पाम के सभी सीमि‍त हैंडसेट्स बि‍क गए थे।

प्री एक स्‍लाइडर स्‍मार्टफोन है जि‍स पर पाम वेब ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम चलता है। मल्‍टीटच स्‍क्रीन वाले इस फोन में लेयर्ड कैलेंडर और लिंक्‍ड कॉन्‍टेक्‍ट्स हैं जि‍ससे यूजर वि‍भि‍न्‍न कैलेंडर्स के साथ लिंक कर सकते हैं और उन्‍हें लेयर्स के रूप में एक स्‍थान पर देख सकते हैं। इससे आप एप्‍लि‍केशंस को बंद कि‍ए बि‍ना उन्‍हें बदल सकते हैं।

पाम प्री के अन्‍य फीचर्स है:

* पाम वेब ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम
* मल्‍टीटच स्‍क्रीन
* लेयर्ड कैलेंडर और लिंक्‍ड कॉन्‍टेक्‍ट्स
* फ्लैश कैमरा
* बि‍ल्‍टइन म्‍यूजि‍क प्‍लेयर
* जीपीएस एक्‍सेस
* ईमेल और वाय फाय कनेक्‍शन
* कंबाइंड मैसेजिंग
* टेक्‍स्‍ट मैसेज और कैलेंडर अपॉइंटमेंट्स नोटि‍फि‍केशन
* पाम मीडि‍या सिंक्रनाइजेशन
* डाउनलोड फीचर

यूएस में इसकी कीमत 199 डॉलर (लगभग 9431 रु.) है। अभी इसके भारतीय बाजार में आने की खबर नहीं है।

Monday, June 8, 2009

एप्‍पल ने बंद कि‍या आईफोन ब्‍लूटूथ हैडसेट

एप्‍पल स्‍टोर ने अपने आईफोन ब्‍लूटूथ हैडसेट को 'डि‍सकंटि‍न्‍यूड' उत्‍पादों की सूची में शामि‍ल कर दि‍या है। कंपनी इसके स्‍थान पर अगले साल तक इसका नया संस्‍करण लॉन्‍च कर सकती है।

जून 2007 में एप्‍पल ने आईफोन ब्‍लूटूथ हैडसेट लॉन्‍च कि‍या था। लेकि‍न यह ज्‍यादा संतोषजनक साबि‍त नहीं हुआ। और इसलि‍ए कंपनी ने अंतत: इसे बंद करने का फैसला कर लि‍या। इसमें ए2डीपी सपोर्ट नहीं है। इसे सि‍र्फ प्रति‍योगी उत्‍पादों के साथ सस्‍ते दामों में समान सुवि‍धाएँ देने के लि‍ए बनाया गया था।
हालाँकि‍ हो सकता है कि‍ एप्‍पल का यह डि‍वाइस अपने नए संस्‍करण में ए2डीपी और ओपरेटिंग सि‍स्‍टम 3.0 सपोर्ट के साथ फि‍र से बाजार में आए। आशा है कि‍ आईफोन ब्‍लूटूथ हैडसेट का अगला संस्‍करण अगर कभी रि‍लीज होता है तो वह सभी कमि‍यों को पूरा करेगा।
बहुत कम समय में इस हैडसेट को सीमि‍त रेंज, सीमि‍त बैटरी और वॉइस डायल कंट्रोल्‍स की कमी के कारण ने बहुत सी आलोचनाएँ झेलनी पड़ी जो वास्‍तव में सही भी थी। ब्‍लूटूथ ट्रेवल केबल और ड्यूल डॉक वाले इस हैडसेट की कीमत डेढ़ साल के अंदर ही 129 डॉलर (6450 रु.) से 99 डॉलर (4950 रु.) कर दी गई थी क्‍योंकि‍ इसकी बि‍क्री नि‍राशाजनक थी। हैडसेट में ज्‍यादा अच्‍छे फीचर्स नहीं थे। लेकि‍न फि‍र भी इसे अपने असान सेटअप, स्‍लि‍म बॉडी और कम वजन के लि‍ए पसंद कि‍या गया।

अगर फि‍र भी आप इसे लेना चाहते हैं तो इससे अच्‍छा समय नहीं हो सकता। तो जल्‍दी कीजि‍ए हैडसेट कुछ ही दि‍नों में बाजार से गायब होने वाला है।

Sunday, June 7, 2009

अक्टूबर में आएगा माइक्रोसॉफ्ट 'विंडोज 7'

दुनिया की टॉप सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि वह अपना नया ऑपरेटिंग सिस्टम 'विंडोज 7 ' आगामी 22 अक्टूबर को बाजार में उतारेगी।
समाचार एजंसी डीपीए के मुताबिक कंपनी ऐपल, गूगल और मुफ्त उपलब्ध ऑपरेटिंग सिस्टम लिनक्स से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए यह कदम उठा रही है।

कंपनी ने लगभग 3 साल पहले अपना पिछला ऑपरेटिंग सिस्टम 'विंडोज विस्टा' बाजार में उतारा था। विस्टा को अनेक खामियों के लिए चौतरफा आलोचना का शिकार होना पड़ा था। कंपनी ने नए ऑपरेटिंग सिस्टम की कीमत के बारे में कोई जिक्र नहीं किया लेकिन उसने कहा कि जिन कंस्यूमर ने जुलाई के बाद विस्टा खरीदा है उन्हें वह अपना सिस्टम अपग्रेड करने की सुविधा जरूर देगी। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर के 90 फीसदी कंप्यूटरों में विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम ही इस्तेमाल किए जाते हैं।

देखने में छोटी पर बड़े काम की

कंप्यूटर का उपयोग करने वाला शायद ही कोई व्यक्ति हो जो कांपेक्ट डिस्क सीडी के नाम से परिचित न हो। छोटी सी सीडी ने तकनीक की दुनिया में धूम मचा दी है। वहीं बाजारों में सीडी की आमद ने टेप रिकार्डर में उपयोग में लाई जाने वाली परंपरागत टेप कार्टिज सामान्य भाषा में कैसेट का सफाया कर दिया है।

राजधानी के एक डीवीडी स्टोर के मालिक अनुज तनेजा ने बताया कि फिल्म प्रदर्शित होने के पहले से ही लोग सीडी का इंतजार करने लगते हैं। संगीत प्रेमियों के बीच भी अब आडियो कैसेट लोकप्रिय नहीं रह गई हैं बल्कि सभी सीडी लेना ही पसंद करते हैं।

कमोबेश यही हाल फिल्म के वीडियो का भी है। वीडियो सीडी के व्यापारी सुनील मंगतानी बताते हैं कि लगभग एक दशक पहले तक लोग नई प्रदर्शित होने वाली फिल्म की वीडियो कैसेट के पीछे दीवाने रहते थे लेकिन अब कैसेट को कोई नहीं पूछता और वीडियो सीडी और डीवीडी हाथों हाथ बिकती हैं।

विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों के लिए भी सीडी जीवन की जरूरत बन चुकी है। सीडी के दाम कम होने और उसकी क्षमता ज्यादा होने से भी इसका दैनिक जीवन में खासा महत्व है। इंजीनियरिंग के विद्यार्थी पीयूष तलवार का कहना है कि परीक्षाओं के दौरान दोस्तों से नोट्स लेने में सीडी का ही उपयोग करते हैं इसके अलावा फिल्मों और संगीत का शौक भी सीडी ही पूरा करती हैं।

मोल्डेड पालीमर से बनने वाली सीडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें डाटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है जिसके चलते इसकी डाटा सुरक्षित रखने की क्षमता कैसेट और फ्लापी जैसे परंपरागत उपकरणों से कहीं ज्यादा होती है साथ ही यह इसी तरह के अन्य उपकरणों से ज्यादा भरोसेमंद होती है।
सीडी के बाद आए इसके आधुनिक रूप डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क डीवीडी की क्षमता और भी ज्यादा होती है जो फिल्म सुरक्षित रखने के काम आती है।

तकनीक की शुरूआत में सीडी रीड आनली सीडी पर सुरक्षित डाटा को सिर्फ पढ़े जा सकने वालीआती थीं लेकिन नई तकनीक के आने के बाद से सीडी पर लिखा भी जाने लगा।

अगले कुछ दिनों में वैज्ञानिक ऐसी भी डीवीडी बाजार में लाने वाले हैं जिनका आकार तो वर्तमान सीडी जैसा ही होगा लेकिन डाटा सुरक्षित रखने की उनकी क्षमता 2 000 गुना ज्यादा होगी। वैज्ञानिक सीडी की क्षमता को नैनोस्कोपिक कणों के उपयोग से बढ़ाए जाने की ओर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।

विश्व को सीडी की सौगात सबसे पहले सोनी कंपनी ने 1976 में दी। सोनी ने सबसे पहले एक आप्टिकल डिजिटल आडियो डिस्क दुनिया के सामने पेश की। इसके बाद सोनी ने ही 1978 में 150 मिनट चलने वाली सीडी बनाई। बाजार में सीडी पहली बार 1982 में आई।

Friday, June 5, 2009

करें पर्यावरण की रक्षा ग्रीन कंप्‍यूटिंग से

वि‍ज्ञान को वरदान के साथ-साथ अभि‍शाप भी कहा गया है। संप्रति‍ वि‍ज्ञान में हो रहे नि‍त नवीन प्रयोगों और अवि‍ष्‍कारों से मानव जीवन जि‍तना सुलभ हो रहा है उतना ही हमारा पर्यावरण दूषि‍त हो रहा है। लेकि‍न फि‍र भी ये उतना ही सही है कि‍ अगर एक ओर वातावरण पर वि‍परीत प्रभाव डालने वाले उत्‍पाद और सेवाएँ बाजार में आ रहे हैं तो उनके प्रभाव से पर्यावरण को बचाने वाली तकनीकें भी वि‍कसि‍त की जा रही हैं। इन्‍हीं में से एक तकनीक है ग्रीन कंप्‍यूटिंग। ग्रीन कंप्‍यूटिंग एक ऐसी तकनीक है जि‍समें कंप्‍यूटर और अन्‍य संबंधि‍त उपकरणों या साधनों का उपयोग पर्यावरण की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए कि‍या जाता है।

ग्रीन कंप्‍यूटिंग में बि‍जली की बचत करने वाले सीपीयू (सेंट्रल पोसेसिंग यूनि‍ट), सर्वर्स और अन्‍य उपकारणों का वि‍कास कि‍या जाता है। वातावरण में जि‍तनी मात्रा में बि‍जली उत्‍सर्जि‍त होती है उसके साथ कार्बन डाई ऑक्‍साइड भी वातावरण में फैलती है जि‍ससे पर्यावरण प्रदूषि‍त होता है। इस तकनीक में ऐसे उत्‍पादों का उपयोग कि‍या जाता है जि‍न्‍हें फि‍र से बनाया जा सके या रि‍सायकल कि‍या जा सके। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के उपयोग को कम कि‍या जाता है और इलेक्‍ट्रॉनि‍क कचरे का उचि‍त तरीके से नि‍पटारा कि‍या जाता है।

ग्रीन कंप्‍यूटिंग के बारे में महत्‍वपूर्ण पहल कुछ वर्षों पहले 1992 में अमेरि‍का में की गई थी। वहाँ एक स्‍वैच्‍छि‍क लेबलिंग कार्यक्रम चलाया गया जि‍से 'एनर्जी स्‍टार' कहा जाता है। इसे एन्‍वायरमेंटल प्रोटेक्‍शन एजेंसी द्वारा सभी तरह के हार्डवेयर के उपयोग में ऊर्जा की बचत को बढ़ावा देने के लि‍ए शुरू कि‍या गया था। एनर्जी स्‍टार लेबल अब नोटबुक कंप्‍यूटर्स और डि‍स्‍प्‍ले में सामान्‍य चीज हो गई है।

कंप्‍यूटर यूजर्स और व्‍यवसायि‍यों को कंप्‍यूटर पर काम करने की अपनी पद्धति‍ में सुधार लाना चाहि‍ए जि‍ससे वातावरण पर होने वाले इलेक्‍ट्रॉनि‍क दुष्‍प्रभावों से बचा जा सके। इनमें से कुछ सुधार नीचे दि‍ए गए हैं:

* जब आप कंप्‍यूटर पर काम नहीं कर रहे हैं तो उसके सीपीयू और अन्‍य उपकरणों को बंद कर दें।

* कंप्‍यूटर संबंधी अपने सारे काम एक साथ नि‍पटा लें और बाकी समय सभी हार्डवेयर बंद रखें।

* लेजर प्रिंटर जैसे उपकरणों जि‍नमें ज्‍यादा बि‍जली की खपत होती है, को काम होने के बाद तुरंत बंद कर दें।

* कैथोड रे ट्यूब (सीआरटी) मॉनि‍टर की अपेक्षा लि‍क्‍वि‍ड क्रि‍स्‍टल डि‍स्‍प्ले (एलसीडी) मॉनि‍टर का उपयोग करें।

* जब भी संभव हो डेस्‍कटॉप कंप्‍यूटर की जगह नोटबुक कंप्‍यूटर का इस्‍तेमाल करें।

* जब भी आपका कंप्‍यूटर खुला हो और उस पर काम न हो रहा हो तो हार्डड्राइव व डि‍स्‍प्ले को बंद करने में पावर मैनेजमेंट की सुवि‍धाओं का उपयोग करें।

* कंप्‍यूटिंग वर्क स्‍टेशन, सर्वर्स, नेटवर्क्‍स और डेटा सेंटर्स के लि‍ए वैकल्‍पि‍क ऊर्जा संसाधन लगाएँ।

* सर्फिंग करते समय जि‍स विंडो या वेबसाइट पर आप काम कर रहे हैं उसके अलावा खुली हुई दूसरी सभी विंडोज या वेबसाइट्स बंद कर दें।

एक अध्‍ययन के मुताबि‍क दुनि‍या भर में लगभग 20 करोड़ लोग इंटरनेट पर खोज करते हैं। इस सर्च के दौरान इंटरनेट कई सर्वरों पर आपके अभीष्ट शब्‍द से संबंधि‍त सामग्री वाली वेबसाइटों को खोजता है जि‍ससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्‍साइड गैस का उत्‍सर्जन होता है। इन सर्वरों पर भारी मात्रा में सामग्री एकत्रि‍त होती है। जि‍सके कारण सर्वर्स बहुत ज्‍यादा लोडेड होते हैं जि‍न्‍हें चलाने और ठंडा रखने के लि‍ए अत्‍यधि‍क बि‍जली की आवश्‍यकता होती है जो अंतत: पर्यावरण पर हानि‍कारक प्रभाव डालते हैं।

ग्रीन कंप्‍यूटिंग के प्रति‍ कंपनि‍यों और बीपीओ में जागरुकता तेजी से बढ़ रही है। भारत में भी अब ग्रीन कंप्‍यूटिंग के प्रति‍ लोग गंभीर हैं और कई आईटी कंपनि‍याँ इसे अपने यहाँ बड़े पैमाने पर लागू भी कर रही हैं। भारत सरकार ने भी एनर्जी एफि‍शि‍एंसी मानक तय कि‍ए हैं। मार्च 2010 तक मानक तय करने के लि‍ए ब्‍यूरो ऑफ एनर्जी एफि‍शि‍एंसी (बीईई) ने आँकड़े जुटाना शुरू कर दि‍या है।

बीईई ऐसा संगठन है जो उपभोग के आधार पर बि‍जली उपकरणों को रेट करता है और बि‍जली की कम खपत वाले उपकरणों के प्रयोग के लि‍ए कंपनि‍यों को प्रोत्‍साहि‍त करता है और ग्रीन कंप्‍यूटिंग के लि‍ए योजनाओं की रूपरेखा तैयार करता है।

बंद होगी याहू 360° सेवा

याहू ने अपनी एक और सेवा को अंतत: बंद कर दि‍या है। याहू 360 सेवा को वर्ष के आरंभ में ही बंद कि‍या जाना था जो अब 13 जुलाई को बंद कर दी जाएगी। यह जानकारी साइट की एक ब्‍लॉग पोस्‍ट में दी गई।

याहू 360 डि‍ग्री (Yahoo! 360°) के बारे पि‍छले दो सालों से चर्चाएँ जारी थी। कंपनी ने कहा कि‍ आज हम नि‍र्णायक रूप से यह घोषणा कर सकते है कि‍ 13 जुलाई 2009 से याहू की याहू! 360° सेवा बंद की जा रही है और आपको 12 जुलाई 2009 याहू पर अपने नए प्रोफाइल में जाने के लि‍ए कहा जाएगा।

याहू! 360° को मार्च 2005 में सोशल नेटवर्किंग/ब्‍लॉगिंग सेवा के रूप में लॉन्‍च कि‍या गया था। हालाँकि‍, इस सेवा को अच्‍छा प्रति‍साद नहीं मि‍ला था। कई वि‍श्लेषक तो ये मानते हैं कि‍ कंपनी याहू! 360° जैसी सेवा का फायदा नहीं उठा पाई। कॉमस्‍कोर के मुताबि‍क याहू 360 के अप्रैल में 1 करोड़ 39 लाख वि‍जि‍टर थे जो वि‍श्व के हर कोने से थे।

अक्‍टूबर 2007 में, जब कंपनी ने पहली बार घोषणा की थी की वह याहू 360 बंद करने वाली है तो उस समय इसके स्‍थान पर यूनि‍वर्सल याहू प्रोफाइल सेवा चालू करने का लक्ष्‍य था।

पि‍छले साल सि‍तंबर में याहू ने अपनी एक अन्‍य सोशल नेटवर्किंग साइट याहू मैश को भी बंद कर दि‍या था। पि‍छले साल कंपनी ने अपनी 'यूनि‍वर्सल' प्रोफाइल सेवा लॉन्‍च की थी जि‍समें सोशल नेटवर्किंग के फंक्‍शंस थे। हालाँकि‍, याहू प्रोफाइल्‍स के फीचर्स याहू 360 से मेल नहीं खाते हैं।

Wednesday, June 3, 2009

गूगल-फायरफोक्‍स ब्राउजर ज्‍यादा सुरक्षि‍त

एक अध्‍ययन से पता चला है कि‍ गूगल के क्रोम या फायरफोक्‍स के यूजर्स सफारी या ऑपेरा जैसे ब्राउजर्स का उपयोग करने वालों से ज्‍यादा सुरक्षि‍त हैं।

स्‍वि‍स फडरल इंस्‍टि‍ट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी और गूगल स्‍वि‍टजरलैंड ने खुलासा कि‍या है कि‍ ब्राउजर को अपडेट रखने वाली इन-बि‍ल्‍ट मैकेनि‍ज्‍म जो स्‍वचालि‍त तरीके से अपडेट्स को डाउनलोड और स्‍थापि‍त करती है ज्‍यादा सुर्क्षि‍त ब्राउजिंग उपलब्‍ध कराती है बजाए ऐसे ब्राउजर के जि‍समें यूजर को अपडेट के लि‍ए संकेत दि‍या जाता है और यूजर को उसे मैन्‍युअली डाउनलोड करना पड़ता है।

अध्‍ययन में बताया गया है कि‍ गूगल के सर्वर्स देखते समय केवल 45 प्रति‍शत इंटरनेट यूजर्स ही सबसे सुरक्षि‍त ब्राउजर संस्‍करण का उपयोग करते हैं। यह भी पाया गया कि‍ फायरफॉक्‍स यूजर्स में से 83 प्रति‍शत ब्राउजर के नवीनतम संस्‍करण का उपयोग कर रहे थे। इसी प्रकार गूगल क्रोम सि‍र्फ 21 दि‍नों में ब्राउजर को अपडेट करता है और 97 प्रति‍शत यूजर्स इसके नवीनतम संस्‍करण का उपयोग कर रहे थे।

इसके वि‍परीत सफारी के केवल 53 प्रति‍शत यूजर्स ने ही सफारी के ब्राउजर को नए संस्‍करण से अपडेट कि‍या था जो 3 हफ्ते पहले जारी कि‍या गया था। नवीनतम संस्‍करण उपयोग करने वाले ऑपेरा यूजर्स का प्रति‍शत और भी कम 24 प्रति‍शत है। इसका सीधा मतलब है कि‍ 76 प्रति‍शत ऑपेरा यूजर्स उन ऑनलाइन खतरों के प्रति‍ संवेदनशील हैं जो नए अपडेट्स से नि‍यंत्रि‍त हो जाते हैं।

आईफोन-एंड्रॉइड पर जीमेल का म्‍यूट फीचर

गूगल ने जीमेल के वेब इंटरफेस को आईफोन और एंड्रॉइड प्‍लेटफॉर्म के लि‍ए और लाइवली और दि‍लचस्‍प बनाया है। गूगल की मोबाइल टीम ने इंटरफेस में एक नया म्‍यूट फीचर जोड़ा है जि‍ससे मेल पढ़ना और आसान हो जाएगा और मेलबॉक्‍स में आपके मेल्‍स व्‍यवस्‍थि‍त होंगे।

नया म्‍यूट वि‍कल्‍प फ्लोटी बार पर मोर (More) मेनू में होता है। जीमेल का नया इंटरफेस आईफोन/आईपोड टच डि‍वाइस जि‍समें ऑपरेटिंग सि‍स्‍टम 2.2.1 फि‍ल्‍मफेयर संस्‍करण हो और एंड्रॉइड डि‍वाइसेस पर उपलब्‍ध है। गूगल मोबाइल के सहायक उत्‍पाद वि‍पणन प्रबंधक डेंग कई चेन ने नए म्‍यूट फीचर के बारे में गूगल के आधि‍कारि‍क ब्‍लॉग पर यह जानकारी दी।

जीमेल मोबाइल का 'म्‍यूट' वि‍कल्‍प सभी वार्तालापों, को म्‍यूट कर देगा, और संबंधि‍त बातचीत के फॉलोअप ईमेल्‍स को आपके इनबॉक्‍स से हटा देगा। मुख्य रूप से म्‍यूट कि‍ए गए ईमेल से संबंधि‍त ईमेल और वार्तालाप इनबॉक्‍स से नि‍काल दि‍ए जाएँगे. म्‍यूट फीचर आपके 'मोर ऑप्‍शंस' ड्रॉप डाउन मेनू के अंदर भी हो सकता है।

इस फीचर की सहायता से यूजर्स अपने मोबाइल डि‍वाइस का स्‍पेस बचा सकेंगे।

अब एटीएम में भी वायरस

एटीएम का उपयोग करने वालों के लि‍ए अब एक बुरी खबर है। रूस की कंप्‍यूटर सुरक्षा प्रयोगशालाओं ने ऑटोमेटि‍क टेलर मशीन याने एटीएम को संक्रमि‍त करने वाले एक ऐसे सॉफ्टवेयर वायरस का पता लगाया है जो आपके बैंक खातों से आपका पैसा चुरा सकता है।

दो अग्रणी एंटी वायरस सॉफ्टवेयर उत्‍पादकों 'डॉक्‍टर वेब' और 'कास्‍पेरस्‍की लैब' ने दावा कि‍या है कि‍ उन्‍होंने कई बैंकों के एटीएम नेटवर्क में एक नए वायरस की खोज की है जो बैंक कार्ड की जानकारी इकट्ठा कर सकता है। कास्‍पेरस्‍की लैब के एक अधि‍कारी ने जानकारी दी कि‍ यह वायरस एक ऐसा मालेशि‍‍यस प्रोग्राम है जो एटीएम को प्रभावि‍त करता है। संभव है कि‍ एक ऐसा सॉफ्टवेयर लाया जाए जो बैंक जानकारी के अवैध उपयोग और फंड नि‍कालने के उद्देश्‍य से बनाया गया हो।

उन्‍होंने बताया कि‍ यह वायरस एक ट्रोजोन है जो एटीएम के पापुलर अमेरि‍कन डायबोल्‍ड ब्रांड को प्रभावि‍त कर सकता है जो रूस और यूक्रेन में उपयोग कि‍या गया है। उपयोग कि‍ए गए प्रोग्रामिंग कोड को देखते हुए लगता है कि‍ प्रोग्रामर पूर्व के सोवि‍यत रि‍पब्‍लि‍क का है।

कंप्‍यूटर सुरक्षा वि‍शेषज्ञों का कहना है कि‍ प्रभावि‍त एटीएम की संख्‍या अभी कम है लेकि‍न जि‍नके पास बैंक के कार्ड्स हैं वे यह पता नहीं लगा सकते कि‍ एटीएम वायरस से प्रभावि‍त है या नहीं। हालाँकि‍ बैंक सुरक्षा सॉफ्टवेयर चलाकर पता कर सकते हैं कि‍ उनकी मशीनों को खतरा है या नहीं।

जीटॉक पर होगा अब सवाल-जवाब


कल्‍पना करें कि‍ आप अपने कि‍सी दोस्‍त से चैटिंग कर रहें हैं और अचानक वो आपसे कोई सवाल करता है जैसे भारत के प्रधानमंत्री कि‍स लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं? तो आप क्‍या करेंगे?

सीधी सी बात है कि‍ यदि‍ आपको इसका जवाब पता है तो आप तुरंत उसे दे देंगे लेकि‍न यदि‍ आपको इसका उत्तर नहीं पता है तो आपको इसे नेट पर सर्च करना होगा जि‍समें काफी वक्त लग सकता है और हो सकता है कि‍ आपके दोस्‍त के पास इतना वक्त ना हो।

इसी मुश्कि‍ल को आसान करने के लि‍ए वेबटू इंस्‍टेंट मैसेंजर बोट ने एक नई सुवि‍धा लॉन्‍च की है जि‍ससे अब आपको अपने मि‍त्र द्वारा पूछे गए अप्रत्‍याशि‍त प्रश्नों के जवाब खोजने के लि‍ए गुगलिंग या सर्चिंग में वक्त जाया नहीं करना होगा।

फि‍लहाल जी टॉक पर यह सुवि‍धा उपलब्‍ध है। इसके लि‍ए आपको अपने जीटॉक के संपर्कों में वेबटूआईएम जोड़ना होगा जि‍ससे वह आपके जीटॉक में इनेबल हो जाए। इस सर्वि‍स का अपना होम पेज होता है और प्रश्नों के उत्तर खोजने के लि‍ए यह सेवा ट्रूनोलेज डॉट कॉम साइट पर उपलब्‍ध ट्रू नोलेज आईपीएल का उपयोग करती है।

जीटॉक के साथ ही आने वाले समय में यह सुवि‍धा याहू, एमएसएन जैसे सभी इंस्‍टेंट मैसेंजर्स पर भी उपलब्‍ध हहो जाएगी। आंसरिंग असि‍स्‍टेंस सर्वि‍स (उत्तर सहायता सेवा) के साथ ही वेबटूआईएम प्रोडक्‍टि‍वि‍टी, ईमेल और सोशल नेटवर्किंग जैसी सेवाएँ भी जल्‍द लाने की योजना बना रही है।

Via- WEB DUNIA